ब्रिटेन के शीर्ष विवि में बांग्लादेशी, पाकिस्तानी अर्थशास्त्रियों की नहीं है खास पहचान
Monday, 26 October 2020 13:59

  • Print
  • Email

लंदन: ब्रिटेन के विश्वविद्यालयों में ऐसे अर्थशास्त्रियों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जो अश्वेत पृष्ठभूमियों से ताल्लुक रखते हैं। लेकिन एक नई शोध में खुलासा हुआ है कि पाकिस्तानी, बांग्लादेशी और अफ्रीकी-कैरेबियन जैसे कुछ समूह ऐसे हैं, जिन्हें यहां के इन प्रतिष्ठित प्रतिष्ठानों में उनकी काबिलियत के मुकाबले खास पहचान नहीं मिलती है।

इंस्टीट्यूट ऑफ फिस्कल स्टडीज (आईएफएस) द्वारा किए गए इस अध्ययन में पाया गया गया कि एक तरफ जहां चीनी और भारतीय व्यक्तित्वों को यहां खास पहचान मिलती है, वहीं अन्य अश्वेत व्यक्तित्वों को कम आंका जाता है या उन्हें बेहतर ढंग से पेश नहीं किया जाता है। ऐसा खासकर रसेल ग्रुप में होता है, जो कि ब्रिटेन में 24 सार्वजनिक अनुसंधान विश्वविद्यालयों का एक स्व-चयनित संघ है, जिसमें ऑक्सफोर्ड और कैम्ब्रिज भी शामिल है।

आईएफएस में रिसर्च इकोनॉमिस्ट रॉस वारविक कहते हैं, "अर्थशास्त्रियों में जातीय विविधता या भेदभाव मायने रखती है क्योंकि नीतियों के निर्माण में इनकी एक अहम भूमिका होती है। ब्रिटेन में पढ़ाने वाले इन अर्थशास्त्रियों के बीच जातीय विविधता समग्र रूप से अन्य किसी और क्षेत्र या आबादियों के मुकाबले ज्यादा देखने को मिलती है।"

उन्होंने आगे कहा, "अध्ययन क्षेत्र में पाकिस्तानी, बांग्लादेशी, अफ्रीकी-कैरेबियन जैसे कुछ समूहों में यह अधिक देखने को मिलता है।"

--आईएएनएस

एएसएन-एसकेपी

 

 

 

Leave a comment

Make sure you enter all the required information, indicated by an asterisk (*). HTML code is not allowed.