भारतीय नौवहन उपग्रह इसी सप्ताह रॉकेट से जुड़ेगा
Tuesday, 17 March 2015 10:12

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चेन्नई : देश के चौथे नौवहन उपग्रह के दोषपूर्ण ट्रांसमीटर को बदलने के बाद 19 मार्च के आसपास उसे रॉकेट से जोड़ दिया जाएगा। एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी। सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (एसडीएससी) के निदेशक एम.वाई.एस. प्रसाद ने आईएएनएस से टेलीफोन पर कहा, "उपग्रह में नए ट्रांसमीटर को फिट कर उसकी जांच किए जाने की संभावना है। इसके बाद उपग्रह को रॉकेट से जोड़ दिया जाएगा।"

ट्रांसमीटर बेंगलुरू में था, जो रविवार को एसडीएससी पहुंचा।

उपग्रह को रॉकेट से जोड़ने के बाद समस्त प्रणाली की जांच की जाएगी, जिसके बाद रॉकेट के प्रक्षेपण की तिथि तय होगी।

प्रसाद ने कहा कि यदि सबकुछ ठीक-ठाक रहा, तो अंतरिक्ष एजेंसी रॉकेट को मार्च के अंत तक प्रक्षेपित करने की योजना बना रही है।

1,425 किलोग्राम वजन वाले उपग्रह -भारतीय क्षेत्रीय नौवहन उपग्रह प्रणाली (आईआरएनएसएस-1डी)- को एक भारतीय रॉकेट यानी ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (पीएसएलवी-एक्सएल) के जरिए नौ मार्च की शाम को छोड़ा जाना था।

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने चार मार्च को पाया कि उसका एक ट्रांसमीटर आईआरएनएसएस-वनडी ठीक से काम नहीं कर रहा है।

इसके बाद, इस गड़बड़ी को ठीकर करने के लिए उपग्रह को रॉकेट से अलग कर लिया गया था।

इसरो के इतिहास में पहली बार किसी उपग्रह को तकनीकी गड़बड़ी के कारण रॉकेट से अलग करना पड़ा है।

नौवहन के लिए आईआरएनएसएस के सातों उपग्रहों का प्रक्षेपण 2015 तक पूर्ण होने की उम्मीद है।

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