सूअरों को सीएसएफ बचाने के लिए नया टीका ईजाद
Monday, 03 February 2020 21:44

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नई दिल्ली: क्लासिकल स्वाइन फीवर (सीएसएफ) से बचाव के लिए सूअरों को लगाए जाने वाले टीके बनाने के लिए अब खरगोशों की बलि नहीं चढ़ेगी, क्योंकि देश के वैज्ञानिकों ने कोशिका कल्चर से नया टीका ईजाद किया है जो काफी कारगर होने के साथ-साथ किफायती भी है और बिल्कुल देसी तकनीक से बनी है। नया सीएसएफ सेल कल्चर वैक्सीन सोमवार रिलीज किया गया। यह टीका भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के तहत आने वाले बरेली स्थित भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) ने तैयार किया है। आईसीएआर के महानिदेशक और सचिव (डेयर) डॉ. त्रिलोचन महापात्रा ने यहां संवाददाताओं को बताया कि सीएसएफ की रोकथाम के लिए सूअरों को जो पहले टीके लगाए जाते थे, उसमें खरगोश की स्प्लीन (तिल्ली) का उपयोग होता था, लेकिन नया वैक्सीन सेल कल्चर से बनाया गया है। इस प्रकार अब सूअरों के लिए टीके बनाने के लिए खरगोशों की बलि चढ़ाने की आवश्यकता नहीं होगी।

डॉ. महापात्रा ने बताया, "वायरस जनित बीमारी के इलाज के लिए कोई दवा नहीं है, लेकिन टीकाकरण से उसकी रोकथाम की जा सकती है। क्लासिकल स्वाइन फीवर के लिए टीकाकरण हम 1964 से ही करते आ रहे हैं, जिसमें युनाइटेड किंगडम के एक वायरस स्ट्रेन का इस्तेमाल करके वायरस बनाया गया। उसमें खरगोश की तिल्ली उपयोग किया जाता था। खरगोश की एक तिल्ली से 50 से 60 खुराक टीका बनता था। हमारी आवश्यकता दो करोड़ खुराक है और हम केवल 12 लाख खुराक बना पाते थे।"

उन्होंने कहा, "2016 में हमने सेल कल्चर से टीका बनाया, लेकिन उसमें जो स्ट्रेन हमने इस्तेमाल किया था, वह विदेशी था लेकिन नए टीके में देसी स्ट्रेन है और इस प्रकार यह काफी सस्ता हो गया है।"

पहले जहां एक टीकाकरण पर अभी 20 रुपये खर्च होता है, वहां नए टीके पर सिर्फ दो रुपये खर्च होंगे। उन्होंने बताया कि नया टीका सूअर में एक बार यह टीका लगने के बाद दो साल तक उसकी सुरक्षा होगी। इस प्रकार यह पहले से ज्यादा किफायती है।

इस मौके पर, केंद्रीय पशुपालन व डेयरी सचिव अतुल चतुर्वेदी ने कहा कि पशुओं में होने वाले उन बीमारियों की रोकथाम बेहद जरूरी है जिनका असर पशुओं से इंसान पर भी होता है। उन्होंने कहा बजट में दूध का उत्पादन दोगुना करने की बात कही गई जो तभी होगा जब पशु रोगमुक्त होंगे और उनके नस्लों में सुधार होगा, जिसके लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है।

डॉ. महापात्रा ने कहा कि नए टीके का छह महीने के भीतर वाणिज्यीकरण शुरू हो जाएगा। प्राप्त जानकारी के अनुसार, देसी कंपनियों के अलावा नेपाल से भी इस टीके की मांग आने लगी है।

--आईएएनएस

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