सीपी जोशी का यू-टर्न, सुप्रीम कोर्ट से वापस ली याचिका
Monday, 27 July 2020 11:35

  • Print
  • Email

जयपुर: राजस्थान में जारी सियासी लड़ाई के बीच राज्य विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी ने सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका वापस ले ली है। सुनवाई शुरू होते ही स्पीकर की ओर से याचिका वापस लेने की इजाजत मांगते हुए कहा गया कि 24 जुलाई को हाईकोर्ट का आदेश आया है, वे आगे की रणनीति तय करेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने याचिका वापस लेने की इजाजत दे दी। गौरतलब है कि स्पीकर ने राजस्थान हाईकोर्ट के 21 जुलाई के आदेश को चुनौती दी थी। हाई कोर्ट ने स्पीकर को 24 जुलाई तक बागी विधायकों के खिलाफ कार्यवाही पर रोक लगाने का आदेश दिया था। इससे पहले इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को सुनवाई हुई थी। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट को फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। 

समाचार एजेंसी एएनआइ के अनुसार राजस्थान बसपा प्रमुख भगवान सिंह बाबा ने कहा कि विधायकों ने बसपा के टिकट पर चुनाव जीता है। इसलिए उन्हें व्हिप जारी किया गया है। विधायक कांग्रेस की गतिविधियों में शामिल नहीं हो सकते या उनके लिए वोट नहीं कर सकते। बसपा प्रमुख ने काफी विचार-विमर्श के बाद यह फैसला किया है। हम उनके निर्देश पर काम कर रहे हैं। छह विधायकों ने बसपा के टिकट पर चुनाव जीता था। सीएम अशोक गहलोत ने इन सभी को कांग्रेस में मिला लिया। राजस्थान में ऐसा पहली बार नहीं हुआ। इससे पहले यह 2008 में भी हुआ था।

राजस्थान राजभवन ने विधानसभा सत्र बुलाने से संबंधित फाइल राज्य के संसदीय कार्य विभाग को वापस कर दी है। राजभवन ने राज्य सरकार से कुछ अतिरिक्त विवरण भी मांगी है। विधानसभा सत्र बुलाने को लेकर अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया गया है। गौरतलब है कि गहलोत मंत्रिमंडल ने शनिवार को 31 जुलाई से विधानसभा का सत्र आहूत करने का नया प्रस्ताव राजभवन भेजा था। प्रस्ताव में राज्यपाल से आग्रह किया गया है कि सात दिन के नोटिस के साथ विधानसभा सत्र बुलाया जाए। कोरोना महामारी पर विशेष चर्चा और छह विधेयक पारित कराने को सत्र बुलाने का कारण बताया गया है। इसमें बहुमत साबित करने का जिक्र नहीं है।

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के छह सदस्यीय विधायक दल के कांग्रेस में विलय को लेकर राजस्थान हाई कोर्ट में सोमवार को सुनवाई होगी। अब पता चला है कि विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीपी जोशी इस संबंध में दायर याचिका खारिज कर चुके हैं, लेकिन अभी तक किसी को जानकारी नहीं दी गई थी। बताया जा रहा है कि दस्तावेजों की कमी को आधार बनाकर उन्होंने इस माह के शुरुआत में यह याचिका खारिज की थी।

Leave a comment

Make sure you enter all the required information, indicated by an asterisk (*). HTML code is not allowed.

Don't Miss