दिल्ली सिविल डिफेंस वॉलेंटियर जान खतरे में डाल निभा रहे फर्ज
Wednesday, 18 November 2020 17:35

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नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में विभिन्न जगहों पर दिल्ली सिविल डिफेंस वॉलेंटियर्स तैनात हैं। डीटीसी बसों, बस अड्डों, कंटेनमेंट जोन, कोरोना जांच केंद्रों व दिल्ली सरकार के अलग अलग अभियानों में इन वॉलेंटियर्स को तैनात किया जाता रहा है। आनंद विहार बस स्टैंड पर करीब 40 वॉलेंटियर हैं जो की यहां बीते करीब 3 महीने से तैनात हैं। सुबह 9 बजे से शाम करीब 5 बजे तक ड्यूटी करते हैं। बीते तीन महीनों में देशभर में मनाए गये सभी त्योहारों पर ये अपना फर्ज निभाते रहे। इन सभी को किसी तरह का कोई अवकाश नहीं दिया गया। जिनके कारण काफी वॉलेंटियर के चहरे पर उदासी है।

बस स्टैंड से हजारों की संख्या में लोग त्यौहार मनाने के लिए अपने अपने परिजनों से मिलने के लिए जा रहे हैं। इन सभी को देख वॉलेंटियर त्यौहारों को याद करके मायूस हो जाते हैं।

दिल्ली निवासी वॉलेंटियर अरुण कुमार ने आईएएनएस को बताया, "कोरोना मरीजों के ही बीच में दीवाली मनाई, जिसकी वजह से मायूसी है। लेकिन फर्ज भी जरूरी है। परिवार वाले भी काम के कारण कुछ नहीं कह पाते। बस एक बार पूछा कि छुट्टी हैं या नहीं।"

उन्होंने बताया जब से कोरोनाकाल शुरू हुआ उस वक्त से एक भी दिन छुट्टी नहीं मिल सकी।

आनंद विहार बस अड्डे पर कोरोना जांच केंद्र के इंचार्ज मनीष खेड़ा ने आईएएनएस को बताया, "काफी संख्या में वॉलेंटियर्स यहां से छोड़ कर भी चले गए। क्योंकि कोरोना जांच केंद्र में उन्हें डर लगता था। दिल्ली सरकार द्वारा वॉलेंटियर्स को न मास्क मुहैया कराया जाता है और न ही सेनिटाइजर दिया जाता है।"

"इन्हें महंगाई भत्ता भी समय पर नहीं दिया जाता। जिसकी वजह से ये काफी परेशान रहते हैं। मई महीने का भत्ता इन्हें अब जाकर मिला है। दिल्ली सरकार को इन वॉलेंटियर्स के बारे में सोचना चाहिए।"

कोरोना जांच केंद्रों में रोजाना 2 हजार जांच होती है और इन्हें पता नहीं होता कि जिस व्यक्ति को ये बुला रहे हैं या बात कर रहें है वो संक्रमित है या नहीं।

यूपी निवासी करण पाल दिल्ली में सिविल डिफेंस वॉलेंटियर हैं और आनंद विहार बस स्टैंड स्थित कोरोना जांच केंद्र में तैनात हैं। दिल्ली में पत्नी और बच्चों के साथ किराए के कमरे में रहते हैं। उन्होंने आईएएनएस को बताया, "यहां ड्यूटी करता हूं लेकिन डर नहीं लगता। क्यूंकि या तो मैं नौकरी कर सकता हूं या डर सकता हूं। दिल्ली में अपनी पत्नी और बच्चों के साथ किराए के मकान में रह रहा हूं। हालांकि परिवार के सदस्य डरते हैं। लॉक डाउन के दौरान खाना बाटने का काम किया और अब यहां मेरी तैनाती की गई है। मैं दिल्ली सरकार से कहना चाहता हूं कि हमारी महनत का पैसा हमें जरूर दिया जाना चाहिए।"

दरअसल इन सभी वॉलेंटियर को अभी तक महंगाई भत्ता भी नहीं दिया गया है, जिसके कारण ये परेशान रहते हैं और आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं।

अन्य वॉलेंटियर्स पुरुषोत्तम भी कोरोना जांच केंद्र में तैनात है उन्होंने आईएएनएस को बताया, "सितंबर महीने से मेरी तैनाती की गई। न मास्क और न ही सैनिटाइजर मुहैया कराया गया। ये सभी हमें अपने पैसों से लेना होता है। जांच केंद्र से कोविड मरीज निकलते हैं बहुत डर लगता है लेकिन नौकरी भी करनी है।"

उत्तराखंड निवासी मोहन सिंह 25 सालों से दिल्ली में रह रहे हैं। बीते 4 सालों से निजी कंपनी में ड्राइवर की नौकरी कर रहे थे, वहीं साथ ही एक निजी खाने की डिलिवरी करने की भी नौकरी करते थे, लेकिन लॉकडाउन में दोनों जगहों से नौकरी गवानी पड़ी। सितंबर महीने से वॉलेंटियर्स की नौकरी शुरू की है। उन्होंने आईएएनएस को बतायाए, "नौकरी में मन लगता है, हमारे सीनियर्स भी हमारा साथ देते हैं, वहीं कोई समस्या होती है तो हमारी बात सुनते हैं।"

--आईएएनएस

एमएसके/एएनएम

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