कोरोना काल में चिड़ियाघर : चैन जानवरों को, कर्मियों को नहीं
Monday, 14 September 2020 18:39

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नई दिल्ली: कोरोना काल में दिल्ली के चिड़ियाघर में दर्शकों की आवाजाही पर रोक लगी हुई है। लोगों के न आने से चिड़ियाघर के अंदर रह रहे जानवर पूरी तरह चैन की जिंदगी बिता रहे हैं। उनके बर्ताव में भी सकारात्मक बदलाव देखा जा रहा है। वहीं, कर्मचारियों को जानवरों की देखभाल और उनके स्वास्थ्य का ज्यादा ख्याल रखना पड़ रहा है।

चिड़ियाघर के अंदर दर्शकों की एंट्री बंद होने के बाद जनवरों को अब सुबह जल्द ही पिंजड़े से निकलने दिया जाता है। यानी जानवर इस समय प्राकृतिक वातावरण में ज्यादा समय गुजार पा रहे हैं।

दिल्ली चिड़ियाघर के निदेशक रमेश के. पांडेय ने आईएएनएस को बताया, "दर्शकों के प्रवेश की पाबंदी होने की वजह से चिड़ियाघर में इन दिनों शोर-शराबा कम है। अब सोते हुए जानवरों को बेवजह कोई नहीं जगाता। इस वजह से जानवर अभी चैन से रह रहे हैं। इसका पॉजिटिव इम्पैक्ट हो सकता है।"

उन्होंने कहा, "हालांकि ये पुख्ता तौर पर साबित कर पाना थोड़ा मुश्किल होगा कि दर्शकों के न आने से जानवरों के बर्ताव में किस तरह का बदलाव आया है। इसका महज अनुमान लगाया जा सकता है।"

पांडेय ने आगे बताया, "चिड़ियाघर को एक समय के अंतराल पर सैनिटाइज किया जा रहा है। चिड़ियाघर का स्टाफ अलग-अलग पैमाने पर जानवरों के लिए काम कर रहा है। जैसे जानवरों का बाड़ा देखना, पानी, खाना, स्वास्थ्य और हाइजीन पर हम इस समय ज्यादा ध्यान दे पा रहे हैं।"

गौरतलब है कि चिड़ियाघर को लॉकडाउन से पहले ही 18 मार्च को आम जनता के लिए बंद कर दिया गया था। वायरस से बचने और रोकथाम के लिए चिड़ियाघर के अंदर मौजूद कर्मचारियों को मुंह पर मास्क लगाना और हाथों में ग्लव्स पहनना जरूरी है।

चिड़ियाघर प्रशासन ने इस समय जानवरों के पिंजड़े खुले छोड़ दिए हैं। बस उनके बाड़ों के गेट पर ताला लगा रहता है, ताकि वे जब चाहे पिंजड़े के अंदर और बाहर घूम सकते हैं।

हाल ही में बूचड़खाने बंद होने की वजह से चिड़ियाघर के अंदर ही एक बूचड़खाना बनाया गया था, जहां से जानवरों के लिए मांस की आपूर्ति की जाती थी। लेकिन पिछले 15 दिनों से पहले की तरह बाहर से ही मांस मंगाया जा रहा है।

इस चिड़ियाघर में करीब 200 कर्मचारी कार्यरत हैं। कोविड-19 महामारी के दौरान चिड़ियाघर के स्टाफ के लिए चुनौतियां बढ़ गई हैं। समूचे चिड़ियाघर को एक निश्चित अंतराल पर सैनिटाइज किया जाता है। कर्मचारियों को मास्क और ग्लव्स पहनने के बाद ही जानवरों के पास जाना होता है। वहीं, जानवरों के घर की सफाई और स्क्रीनिंग भी की जा रही है।

चिड़ियाघर के निदेशक ने आईएएनएस को आगे बताया, "दर्शक न होने की वजह से हम एनिमल वेलफेयर पर आसानी से काम कर पा रहे हैं। बड़े जानवर जैसे हाथी, बाघ, तेंदुआ, जैगुआर इन सभी की रेगुलर स्क्रीनिंग की जा रही है।"

उन्होंने कहा कि कोरोना काल में सेहत के नजरिये से लोगों की सुरक्षा जितनी जरूरी है, उतना ही जानवरों की सुरक्षा भी महत्वपूर्ण है। इनमें कोरोना के अलावा अन्य बीमारियां भी होती हैं, जिनका हमें ध्यान रखना होता है। ये भी गौर करना जरूरी होता है कि इंसानों या जानवरों की वजह से एक-दूसरे में कहीं कोई संक्रमण न फैले।

पांडेय ने बताया कि चिड़ियाघर का स्टाफ सुबह 6 से रात 12 बजे तक काम करता है। चिड़ियाघर के अंदर हर चीज पर नजर रखी जाती है। जिस तरह एक मां अपने बच्चे का ख्याल रखती है, उसी तरह हमें इन जानवरों का ध्यान रखना होता है। हम लोगों के लिए हर दिन एक नई चुनौती होती है।

उन्होंने कहा, "भविष्य में सरकार द्वारा अगर चिड़ियाघर को खोलने का आदेश और दिशा-निर्देश आते हैं तो उनका पालन किया जाएगा। हम कोशिश करेंगे कि ज्यादा से ज्यादा चीजें ऑनलाइन हो सकें। वहीं, हम यह भी ध्यान रखेंगे कि दो कर्मचारियों के बीच उचित दूरी बनी रही ।"

निदेशक के कहा, "चिड़ियाघर का उद्देश्य राजस्व कमाना नहीं, बल्कि लोगों को जानवरों के बारे में शिक्षा देना है। जो बच्चा किताबों में टाइगर की तस्वीर देखता है और जब यहां आकर उसे जीता-जागता देखता है तो उसके बारे में ज्याद जान पाता है।"

--आईएएनएस

एमएसके/एसजीके

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