चकमा आदिवासियों ने मिजोरम सरकार के 'गलत' अभियान की आलोचना की
Thursday, 10 October 2019 09:32

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आइजोल: चकमा आदिवासियों के विभिन्न संगठनों ने बुधवार को मिजोरम सरकार और मुख्यमंत्री जोरमथांगा द्वारा कथित रूप से 'राज्य में चकमाओं के खिलाफ गलत अभियान और छात्रों के साथ दुर्व्यवहार' की कड़ी आलोचना की। आईएएनएस के प्रयासों के बावजूद मिजोरम सरकार ने चकमा संगठनों के आरोपों का जवाब नहीं दिया।

मिजोरम के जवाहर नवोदय विद्यालय (जेएनवी) में चकमा छात्रों पर हुए कथित अत्याचार के विरोध में पिछले सप्ताह चकमा छात्रों ने गुवाहाटी में रैलियों का आयोजन किया था। इस दौरान उन्होंने इस मामले में केंद्र सरकार के हस्तक्षेप की मांग की थी।

ऑल इंडिया चकमा स्टूडेंट्स यूनियन (एआईसीएसयू) और राइट्स एंड रिस्क एनालिसिस ग्रुप (आरआरएजी) ने अपने अलग-अलग प्रेस बयानों में मिजोरम के मुख्यमंत्री जोरमथांगा के 'चकमा विरोधी बयान' की निंदा की।

बयानों में कहा गया है, "नई दिल्ली की पत्रिका को दिए एक साक्षात्कार में जोरमथांगा ने कहा है कि मैं राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) चाहता हूं क्योंकि यहां पर चकमा के रूप में बांग्लादेशी घुसपैठिए हैं।"

एआईसीएसयू ने अपनी रिलीज में बताया कि चकमा के दस प्रमुख गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) ने एक प्रस्ताव में इसकी निंदा की है। प्रेस रिलीज में बताया गया, "मिजोरम के मुख्यमंत्री जोरमथांगा के बयानों ने चकमाओं को बांग्लादेशी घुसपैठियों के रूप में बताया है, जो नस्लवादी और अपमानजनक है। हम इसकी कड़े शब्दों में निंदा करते हैं।"

चकमा एनजीओ ने मुख्यमंत्री जोरमथांगा से राज्य में रहने वाले अल्पसंख्यकों के मानवाधिकारों का सम्मान करते हुए अंतर-सामुदायिक विश्वास बनाने और सहिष्णु समाज के निर्माण के लिए काम करने की अपील भी की है।

--आईएएनएस

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