महाराष्ट्र सरकार की ऑक्सीजन का राशनिंग करने की योजना का डॉक्टरों ने किया विरोध
Tuesday, 22 September 2020 05:23

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मुंबई: महाराष्ट्र सरकार ने कोविड-19 सार्वजनिक और निजी अस्पताल के वार्ड/आईसीयू में मरीजों के लिए चिकित्सा ऑक्सीजन की राशनिंग करने का फैसला किया है, जिसका चिकित्सा बिरादरी ने विरोध किया है।

राज्य में डॉक्टरों ने इस कदम को 'दुनिया में अभूतपूर्व', 'भयानक' करार देते हुए निंदा किया है, यह कुछ ऐसा है जो कोरोना मरीजों की मृत्यु दर को बढ़ा सकता है। उन्होंने कहा कि "यह बेहतर होगा कि सरकार सभी निजी अस्पतालों को अपने दम पर चलाए।"

प्रधान सचिव (स्वास्थ्य) प्रदीप व्यास द्वारा जारी 18 सितंबर के एक सर्कुलर के अनुसार, कोविड ऑक्सीजन वार्ड या इंटेसिंव केयर यूनिट में मरीजों की संख्या की तुलना में ऑक्सीजन की बहुत अधिक खपत होने--राष्ट्रीय औसत से तीन बार से अधिक खपत होने के कारण यह फैसला लिया गया।

व्यास ने कहा कि मेडिकल ऑक्सीजन की वर्तमान खपत प्रतिदिन 600 टन से ऊपर है और विकास की तेज दर से, आशंका है कि यह कुछ दिनों के बाद राज्य में विनिर्माण क्षमता को पीछे छोड़ सकता है।

व्यास ने गंभीर रूप से कहा, "भारत सरकार ने महाराष्ट्र में जो मरीज ऑक्सीजन पर है, उनकी संख्या पर विचार करते हुए प्रतिदिन महाराष्ट्र में इस्तेमाल होने रही ऑक्सीजन की मात्रा पर गंभीर चिंता जताई है।"

एक तथ्य यह है कि लगभग 1,08,000 रोगियों का एक आंकड़ा - जिन्हें छुट्टी दे दी गई है - मैनुअल सारणीकरण में विसंगति के कारण सरकारी रिकॉर्ड पर अपडेट नहीं किया गया है।

इसका मतलब यह है कि महाराष्ट्र में कम संख्या में डिस्चार्ज और कम रिकवरी दर दिखाई गई है, लेकिन अगर इस आंकड़े का हिसाब लगाया जाए, तो यह राज्य में लगभग 15 प्रतिशत रोगियों के आक्सीजन उपचार प्राप्त करने की ओर इशारा करता है। उन्होंने कहा तिक राष्ट्रीय औसत 5-6 प्रतिसथ से बहुत अधिक है।

व्यास ने कहा, "तो, यह स्पष्ट है कि ऑक्सीजन का कोई विवेकपूर्ण इस्तेमाल नहीं है।" उन्होंने कहा कि पैसे बनाने के लिए निजी अस्पतालों द्वारा मरीजों को ऑक्सीजन पर रखने का चलन सा बन गया है और ऐसी गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखने की जरूरत है।

सरकार ने अब आदेश दिया है कि वाडरें में ऑक्सीजन की खपत 7 लीटर प्रति मिनट और आईसीयू में 12 लीटर प्रति मिनट तक सीमित होनी चाहिए।

सभी अस्पतालों को लीक के कारण मेडिकल ऑक्सीजन के अपव्यय को रोकने के लिए खपत को लेकर इन प्रतिबंधों का पालन करने के लिए निर्देशित किया गया है।

महाराष्ट्र इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के अध्यक्ष अविनाश भोंडवे ने एक मरीज के जीवन की कीमत पर प्रशासन के इस आदेश को 'सबसे बड़ा और सबसे क्रूर हमला' करार दिया।

भोंडवे ने आईएएनएस को बताया, "यह चिकित्सकों की पेशेवर स्वायत्तता पर एक और सीधा प्रहार है, डॉक्टरों की चिकित्सकीय कुशलता पर एक अनुचित सवाल है। यह ऑक्सीजन की आपूर्ति की खराब बंदोबस्त को कवर करने का एक प्रयास है।"

उन्होंने कहा कि कुछ मरीज ऐसे हैं जिन्हें 20 लीटर / मिनट की आवश्यकता होगी और कुछ को 80 लीटर / मिनट तक भी चाहिए होगा, जिसे हाई फ्लो नेजल ऑक्सीजन (एचएफएनओ) के रूप में जाना जाता है और 7-12 लीटर की ऐसी सीमाएं रखना बिल्कुल बेतुका है और यह फैसला मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे द्वारा गठित कोविड स्पेशल टास्क फोर्स की सलाह के बिना भी लिया गया है।

आईएमए के राज्य सचिव पंकज भंडारकर ने कहा, "पूरे चिकित्सा पेशे के लिए इससे अधिक हास्यास्पद, अपमानजनक कुछ नहीं हो सकता है जो घातक कोविड महामारी से लड़ रहा है और जिसने खुद को मानवता की सेवा में समर्पित किया है।"

एक पूर्व पदाधिकारी और आईएमए सदस्य पार्थिव सांघवी ने कहा कि सभी मेडिकोज इस आदेश के विरोध में हैं, क्योंकि इसका प्रभाव इस बात पर पड़ सकता है कि कोई मरीज बचता है या मर जाता है।

भोंडवे ने कहा कि केवल बड़े कोविद अस्पतालों की स्थापना करना पर्याप्त नहीं है क्योंकि यह चिकित्सा बुनियादी ढांचे और डॉक्टर हैं जो अंतत: रोगी को ठीक करने में मदद करते हैं, लेकिन "यदि रोगियों को कुछ भी होता है, तो डॉक्टर पीटे जाते हैं।"

आईएएनएस द्वारा बार-बार प्रयास करने के बावजूद, स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे और व्यास से संपर्क नहीं हो सका।

--आईएएनएस

वीएवी

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