सुप्रीम कोर्ट ने मप्र हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाई, चुनाव आयोग लेगा रैलियों पर फैसला
Monday, 26 October 2020 21:14

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नई दिल्ली: मध्य प्रदेश में तीन नवंबर को होने वाले विधानसभा उपचुनावों से जुड़े हाईकोर्ट के एक आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है। सुप्रीम कोर्ट ने मध्यप्रदेश उपचुनाव में वर्चुअल चुनाव कैंपेनिंग के मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाई है। शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी, लेकिन यह भी माना कि अगर कोविड-19 महामारी की पृष्ठभूमि में स्वास्थ्य प्रोटोकॉल का पालन किया जाता, तो इस तरह की स्थिति उत्पन्न ही नहीं होती।

न्यायमूर्ति ए. एम. खानविल्कर की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा, "यदि राजनीतिक दलों ने प्रोटोकॉल बनाए रखा होता, तो यह स्थिति उत्पन्न नहीं होती।"

हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाते हुए, पीठ ने कोविड-19 दिशानिर्देशों की पृष्ठभूमि में भारत के चुनाव आयोग से राजनीतिक रैलियों के संबंध में एक उचित निर्णय लेने के लिए कहा।

पीठ ने कहा कि यदि राजनीतिक दलों ने अपना काम बेहतर तरीके से किया होता तो हाईकोर्ट हस्तक्षेप नहीं करता।

पीठ ने कहा, "यह सुनिश्चित करें कि आप अपने कर्तव्यों का निर्वहन ऐसे तरीके से करें, जो सभी के हित में हों।"

शीर्ष अदालत में चुनाव आयोग तथा मध्यप्रदेश के ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर की याचिकाओं पर सुनवाई हो रही थी, जिनमें हाईकोर्ट के 20 अक्टूबर के आदेश को चुनौती दी गई थी।

शीर्ष अदालत ने तोमर की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी से कहा कि वह चुनाव आयोग को बताएं कि हाईकोर्ट के आदेश के चलते चुनाव प्रचार का कितना वक्त बर्बाद हुआ।

चुनाव आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने हाईकोर्ट के आदेश की पृष्ठभूमि में कहा कि संविधान के तहत चुनावों के आयोजन और प्रबंधन की देखरेख का जिम्मा उसका है और संविधान के अनुच्छेद 329 के तहत चुनावी प्रक्रिया के मध्य में न्यायिक दखल पर रोक है।

मध्य प्रदेश में ग्वालियर विधानसभा सीट के उपचुनाव के लिए भाजपा के उम्मीदवार तोमर ने अनुरोध किया कि हाईकोर्ट ने एक त्रुटि की है, क्योंकि यह अनदेखी है कि अनुच्छेद 324 के तहत चुनाव आयोग ने सितंबर-अंत में कोविड-19 दिशानिर्देश जारी किए थे, जिसमें प्रतिबंधों के साथ फिजिकल तौर पर सार्वजनिक अनुमति की अनुमति दी गई थी।

राज्य की 28 विधानसभा सीटों के लिए उपचुनाव तीन नवंबर को कराए जाने हैं। याचिका में कहा गया है कि दिशानिर्देशों और राज्य सरकार एसओपी के अनुसार, सुरक्षा उपायों के साथ 100 से अधिक लोगों की राजनीतिक सभाओं की अनुमति दी जा सकती है।

--आईएएनएस

एकेके/जेएनएस

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