त्योहारी सीजन से पहले चलेंगी अतिरिक्त 200 ट्रेनें, बदलेगी व्यवस्था, बिन यात्रियों वाले रूट पर नहीं होगा संचालन
Sunday, 27 September 2020 19:44

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नई दिल्ली: भारतीय रेलवे ने आगामी त्योहारी सीजन शुरू होने से पहले एक सौ जोड़ी अतिरिक्त ट्रेनों को चलाने की तैयारियां शुरू कर दी है। लेकिन इन तमाम कवायदों के बावजूद कोरोना संकट के चलते भारतीय रेलवे ट्रेन सेवाओं को पूरी तरह बहाल कर पाने में खुद को समर्थ नहीं पा रहा है। इस साल के आखिर तक पूरी ट्रेनों का संचालन सामान्य होने की संभावना नहीं है। नए साल 2021 में ही सभी 13,500 ट्रेनों के पटरियों पर दौड़ पाने का अनुमान है। यही नहीं जिन राज्यों में कोरोना का प्रकोप बढ़ रहा है वहां से होकर ट्रेनों को गुजरने की पूरी छूट भी नहीं है।

रेलवे बोर्ड के चेयरमैन विनोद कुमार यादव ने दैनिक जागरण से बताया कि फिलहाल जितनी स्पेशल ट्रेनें चल रहीं हैं उनमें भी कुछ रूटों पर यात्रियों की संख्या संतोषजनक नहीं है। देश में सात ऐसे राज्य हैं, जहां कोरोना का संक्रमण लगातार बढ़ रहा है। महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, दिल्ली, पंजाब, तमिलनाडु और नार्थ ईस्टर्न के राज्य प्रमुख हैं, जिनमें कोरोना संक्रमण काबू में नहीं होने की वजह से वहां ट्रेनों का संचालन सामान्य करने में दिक्कत पेश आ रही है। यादव ने एक सवाल के जवाब में बताया कि दिसंबर 2020 तक ट्रेनों के संचालन के सामान्य होने पर संदेह है।

कोरोना संक्रमण के चलते रेलवे के कर्मचारी और अधिकारी हलकान हैं। सामान्य दिनों में रेलवे की पटरियों पर साढ़े तेरह हजार से अधिक ट्रेनें दौड़ती हैं। फिलहाल केवल 456 स्पेशल ट्रेनों का संचालन किया जा रहा है। त्यौहारी सीजन शुरु होने से पहले यानी नवरात्र के समय 100 जोड़ी और स्पेशल ट्रेनों के चलाए जाने की तैयारी है। इस बारे में विनोद कुमार यादव ने बताया कि इन ट्रेनों का संचालन उन्हीं रूटों पर किया जाएगा, जहां से यात्रियों की मांग और राज्यों की सहमति होगी। दिसंबर तक का संक्षिप्त ब्यौरा देते हुए उन्होंने बताया कि चरणबद्ध तरीके से स्पेशल ट्रेनें ही चलाई जा सकेंगी।

फिलहाल चल रही कई ट्रेनों में यात्रियों की संख्या लगातार घट रही है। इससे स्पष्ट है कि लोग बहुत आवश्यक होने पर ही यात्रा कर रहे हैं। इसलिए सभी ट्रेनों को ट्रैक पर उतारने की कोई योजना फिलहाल नहीं है। विनोद कुमार यादव ने बताया कि रेलवे जीरो बेस्ड टाइम टेबल लागू करने की तैयारी में है। मांग आधारित रुटों पर ट्रेनें चलेंगी। जिन रूट पर यात्रियों की संख्या के मुकाबले ज्यादा ट्रेनें चल रही हैं, उन्हें हटाकर दूसरे रूट पर चलाया जा सकता है। कोरोना काल के दौरान इसे प्रायोगिक तौर पर शुरु किया जा रहा है।

रेलवे बोर्ड के चेयरमैन विनोद कुमार यादव ने यह भी बताया कि आने वाले दिनों में इस व्‍यवस्‍था को पूरी तरह लागू कर दिया जाएगा। मंत्रालय की संसदीय समिति ने भी इसे हरी झंडी दे दी है। राजनीतिक दबावों में घाटे वाले रुटों पर बिना यात्रियों के ट्रेनों को दौड़ाने का कोई औचित्य नहीं है। जिस भी रूट पर 10 से 15 दिनों की वेटिंग होगी वहां पर अतिरिक्त डुप्लीकेट या क्लोन ट्रेनें चलेंगी जो ओरिजिनल ट्रेन के मुकाबले तेजी से अपने गंतव्य पर पहुंचेगी। इस नई प्रणाली में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का सहारा लिया जाएगा। 

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